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बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला, कहा -ड्यूटी पर तैनात सीबीआई अधिकारियों से पहचान पत्र मांगने वाले वकील पर नहीं होगा मामला दर्ज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार (21 नवंबर) को कहा कि एक वकील पर सरकारी कर्मचारी (सीबीआई अधिकारी) को उसके कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए मामला दर्ज नहीं किया जा सकता, सिर्फ इसलिए कि उसने छापेमारी/तलाशी अभियान चला रहे सीबीआई अधिकारियों की टीम से उनके पहचान पत्र (आईडी) दिखाने के लिए कहा।

सिंगल जज जस्टिस मिलिंद जाधव ने दो वकीलों और एक कानून प्रशिक्षु (तत्कालीन) को बरी कर दिया, जिन पर 2007 में मुंबई में अपने एक मुवक्किल के परिसर में तलाशी अभियान चलाने से सीबीआई अधिकारियों को रोकने के लिए मामला दर्ज किया गया था।

जस्टिस जाधव ने निर्णय में कहा, “किसी अधिकारी को केवल रोकना आईपीसी की धारा 353 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा। रोक की प्रकृति महत्वपूर्ण है। सीबीआई अधिकारियों से उनके पहचान पत्र दिखाने के लिए कहना उन्हें उनके कर्तव्य का पालन करने से नहीं रोक रहा है। यह एकमात्र ऐसी बात है जो वर्तमान मामले में हुई है, जिसके कारण आवेदकों पर अभियोग लगाया गया है। आवेदक संख्या 1 संबंधित पक्ष का वकील था। आवेदक संख्या 2 और 3 को बिना किसी गलती के उपरोक्त कार्रवाई के परिणाम भुगतने पड़े।”

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