MODI TRUMP TRADE DEAL : Why is the Modi-Trump deal stuck?
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील अटकने की असली वजह अब सामने आ गई है। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि भारत के साथ डील किसी पॉलिसी विवाद की वजह से नहीं, बल्कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधे फोन न करने के कारण रुकी।
लुटनिक के मुताबिक भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग फाइनल थी। तीन शुक्रवार की समय-सीमा तय की गई थी और ट्रम्प खुद इस डील को क्लोज करना चाहते थे। इसके लिए सिर्फ इतना जरूरी था कि पीएम मोदी राष्ट्रपति ट्रम्प को कॉल करें, लेकिन भारतीय पक्ष ने ऐसा नहीं किया। ट्रम्प ने इसे अपने ‘ईगो’ पर ले लिया और डील आगे नहीं बढ़ी।
एक पॉडकास्ट में लुटनिक ने कहा, “पूरी डील तैयार थी, मोदी को बस एक फोन करना था। लेकिन कॉल नहीं आया और बात वहीं अटक गई।”
इस देरी का फायदा दूसरे देशों को मिला। अमेरिका ने भारत से पहले इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के साथ ट्रेड डील कर ली। लुटनिक ने ब्रिटेन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समय रहते ट्रम्प को कॉल किया और अगले ही दिन डील का ऐलान हो गया।
भारत के लिए चिंता की बात यह है कि जो शर्तें पहले तय हुई थीं, अब वे मेज पर नहीं हैं। लुटनिक ने साफ कहा कि अमेरिका अब पुराने ऑफर से पीछे हट चुका है और अगर नई बातचीत होती है, तो भारत को ज्यादा सख्त शर्तों का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले साल जुलाई में ट्रम्प ने पीएम मोदी को चार बार कॉल किया था, लेकिन बातचीत नहीं हो पाई। भारत को आशंका थी कि ट्रम्प बातचीत के नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं। भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर ट्रम्प की मध्यस्थता की कोशिशों को भी मोदी ने ठुकरा दिया था, जिससे नाराजगी और बढ़ी।
जानकारों का मानना है कि इसी ‘ईगो क्लैश’ का असर टैरिफ पर दिखा। अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और 25% रूस से तेल खरीदने को लेकर है। अमेरिका का दावा है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध में मदद मिलती है, जबकि भारत इसे गलत पेनाल्टी बता रहा है।
2024-25 में अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 41.18 बिलियन डॉलर हो गया है। इसी बीच ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंधों से जुड़े बिल को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इस बिल पर अगले हफ्ते अमेरिकी संसद में वोटिंग हो सकती है।

