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CG BREAKING : बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में EOW ने पेश किया तीसरा पूरक चालान

CG BREAKING: EOW presented third supplementary challan in the much talked about excise scam case


रायपुर।
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाला मामले में सोमवार को EOW ने विशेष कोर्ट में तीसरा पूरक चालान पेश कर दियाहै। एजेंसी ने आरोपी अनिल टुटेजा, सुनील दत्त, विकास अग्रवाल के खिलाफ दो हजार से ज्यादा पन्नों का चालान कोर्ट में पेश कियाहै। वहीं विकास अग्रवाल उर्फ शिबू अपने परिवार समेत फरार है, EOW ने उसकी फरारी का चालान किया है। विकास अग्रवाल उर्फशिबू आबकारी घोटाले के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर का विश्वसनीय सहयोगी है। उसे पकड़ने के EOW और ईडी लगातार प्रयास कररही है। 

पसंदीदा अफसरों की नियुक्ति कराता था अनवर ढेबर 

उल्लेखनीय है कि, शराब घोटाले का आरोपी अनवर ढेबर तथा एपी त्रिपाठी को मेरठ जेल से वापस रायपुर लाने के बाद ईडी ने दोनोंआरोपियों से पूछताछ करने रिमांड पर लिया था। अनवर तथा एपी से पूछताछ के आधार पर ईडी ने बयान जारी कर दावा किया है कि, अनवर ढेबर ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा के साथ मिलकर सिंडीकेट बनाया था। अनिल टुटेजा विभाग में अपने पसंदीदा अफसरों कीनियुक्ति कराता था।

ED का दावाआबकारी विभाग में मंत्री की हैसियत रखता था अनवर ढेबर

ईडी के अनुसार, अनवर ढेबर आबकारी विभाग में मंत्री की हैसियत रखता था। ईडी द्वारा जारी बयान के मुताबिक, जांच में यह खुलासाहुआ है कि अरुणपति त्रिपाठी ने सरकारी शराब दुकान, जिसे पार्टबी कहा जाता है, के माध्यम से बेहिसाब शराब बिक्री की योजना कोलागू करने में अहम भूमिका निभाई। उसने ही 15 जिले, जहां अधिक शराब बिक्री होती थी और राजस्व आता था, उन जिलों केआबकारी अधिकारियों के साथ मीटिंग कर अवैध शराब बेचने के निर्देश दिए थे। इंडी के अनुसार, एपी त्रिपाठी ने ही विधु गुप्ता के साथडुप्लीकेट होलोग्राम की व्यवस्था की थी। 

सिंडीकेट ने की 21 सौ करोड़ की अवैध कमाई 

 शराब घोटाले की जांच में ईडी ने पाया कि घोटाले की वजह से राजस्व का बड़ा नुकसान हुआ। घोटाले के माध्यम से सिंडिकेट ने 21 सौकरोड़ रुपए से ज्यादा अवैध कमाई की है। शराब घोटाला मामले में ईडी ने घोटाले में शामिल आरोपियों की 18 चल और 161 अचलसंपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी कीमत करीब 205.49 करोड़ रुपए आंकी गई है।

तीन वर्षों तक चला खेल

ईडी के दावों के मुताबिक, शराब घोटाले का खेल वर्ष 2019 से 2022 के बीच जारी रहा। घोटाला करने कई तरीके अपनाए गए, उनमेंनकली होलोग्राम का इस्तेमाल भी शामिल है। ईडी ने घोटाले को तीन केटेगरी बी सी में बांटा है। तीन केटेगरी में जो घोटाला कियागया, वह इस तरह से है।

छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग

कॉर्पोरेशन लिमिटेड (शराब की खरीद और बिक्री के लिए राज्य के निकाय) की ओर से शराब की प्रत्येक पेटी के लिए डिस्टलर्स सेरिश्वत ली गई थी। इस पार्ट में सीएसएमसीएल के एमडी अरुणपति त्रिपाठी को अपने पसंद के डिस्टिलरी की शराब को परमिट करनाथा। जो रिश्वतकमीशन को लेकर सिंडीकेट का हिस्सा हो गए थे।

सरकारी शराब दुकान के जरिए

बेहिसाब कच्ची और देशी शराब की अवैध बिक्री की गई। उक्त बिक्री नकली होलोग्राम से हुई, जिससे राज्य के खजाने में एक भी रुपयानहीं पहुंचा और बिक्री की सारी राशि सिंडीकेट की जेब में पहुंची।

कार्टेल बनाने और बाजार में

निश्चित हिस्सेदारी रखने की अनुमति देने के लिए डिस्टलर्स से रिश्वत ली गई और एफएल 10 लाइसेंस धारक, जो विदेशी शराबउपलब्ध कराते थे, उनसे भी कमीशन लिया गया।

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