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नौकरी से हटाया तो प्रेरक ने मौत को गले लगाया, कर्ज में भी था प्रेरक, नौकरी जाने से बेरोजगारी और गरीबी ने किया लाचार

जांजगीर-चाम्पा | शिवरीनारायण थाने के कुरियारी गांव में नौकरी जाने और कर्ज के चलते साक्षर भारत के प्रेरक धनीराम खूंटे ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली. मृतक की पत्नी संतोषी बाई ने भी कहा है कि नौकरी जाने के बाद धनीराम खूंटे, परेशान रहता था. कर्ज और गरीबी के चलते वह परिवार समेत मौत को गले लगाने की बात कहता था. इस मामले की जांच को लेकर कांग्रेस ने 11 सदस्यीय दल का गठन किया है. जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता शिशिर द्विवेदी ने बताया कि कांग्रेस का जांच दल 8 जुलाई रविवार को कुरियारी गांव जाएगा और पीड़ित परिवार से भेंट कर घटना की जानकारी लेगी और जिला कांग्रेस कमेटी को रिपोर्ट सौंपी जाएगी.
दरअसल, मार्च 2018 से साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत बहुत कम मानदेय में कार्यरत प्रेरकों को नौकरी से निकाल दिया गया, जिसके बाद प्रेरक सड़क पर आ गए और बेरोजगारी की गर्त में चले गए.
प्रेरक संघ के प्रदेश प्रवक्ता चिंताराम ने भी नौकरी जाने को लेकर कुरियारी गांव के धनीराम खूंटे द्वारा खुदकुशी करने की बात कही है, क्योंकि नौकरी से निकाले जाने के बाद प्रेरक, गरीबी और बेरोजगारी से परेशान हैं. छग में 17 हजार प्रेरक हैं, जिनका भविष्य दांव पर है. सरकार ने एक झटके में नौकरी से निकाल दिया, जबकि सरकार द्वारा साक्षर भारत कार्यक्रम के अलावा दूसरे काम भी लिए जा रहे थे. इस तरह नौकरी जाने के बाद छग के हजारों प्रेरक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं और डिप्रेशन में आकर आत्मघाती कदम उठा रहे हैं, उसका एक बड़ा उदाहरण धनीराम खूंटे द्वारा खुदकुशी करने की घटना है. नौकरी जाने के बाद धनीराम ने ऐसा कदम उठाया कि उसके परिवार, पत्नी और बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है.





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