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EXCULSIVE:सीडीकांड की पिक्चर अभी बाकी है..मीडिया सहित 39 संदेही घेरे में, भाजपा के एक बड़े नेता की 9 माह पुरानी सीडी से भी लिंक

रायपुर(खबरचालीसा)। छत्तीसगढ़ के मंत्री राजेश मूणत की कथित सेक्स सीडी को लेकर कयासों का बाजार गरम है। सीडी के असली-नकली से लेकर इसके निर्माता-निर्देशकों के बारे में तरह-तरह की चर्चा सुनने मिल रही है। इन चर्चाओं में ठोस कुछ भी नहीं है, लेकिन पुलिस और शासन से जुड़े विश्वस्त सूत्र जो ठोस जानकारी दे रहे हैं, उसके मुताबिक एसआईटी ने करीब 39 लोगों की सूची तैयार की है। उनसे पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के बाद पूरे प्रकरण की परत खुलने का दावा किया जा रहा है। इस सीडीकांड की जांच में एक सनसनीखेज जानकारी यह भी सामने आई है कि करीब 9-10 माह पहले भाजपा के एक बड़े नेता की सीडी की बनाई गई थी। हालांकि उक्त नेता की सीडी सार्वजनिक नहीं हो पाई थी। पुलिस ने इस सीडी के सूत्रधारों की भी जानकारी हासिल कर ली है। अब एसआईटी को सीबीआई के आने का इंतजार है। हालांकि सीबीआई ने अभी इस प्रकरण में मामला पंजीबद्ध नहीं किया है।

छत्तीसगढ़ में इन दिनों मंत्री की कथित अश्लील सीडी की चर्चा जोरों पर है। आम जनता से लेकर शासन-प्रशासन से जुड़े लोग इसकी सच्चाई जानने के लिए उत्सुक हैं। यही वजह है कि हर रोज कोई नया शिगूफा सुनने को मिलता है। छत्तीसगढ़ पुलिस की जांच में अब तक जो ठोस तथ्य सामने हैं, उसके मुताबिक पुलिस ने 39 संदेहियों की सूची बनाई है, जिसमें से काफी लोगों से पूछताछ हो गई है और कुछ से होनी बाकी है। इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। सीडीकांड में मुख्य आरोपी बनाए गए विनोद वर्मा भी पत्रकार हैं, और लंबे समय तक बड़े मीडिया घरानों में ऊंचे पद पर काम कर चुके हैं, वे एडिटर गिल्ड में भी है, हालांकि वे कुछ दिनों से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल के सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। पुख्ता जानकारी के मुताबिक एसआईटी ने विनोद वर्मा को सीडी उपलब्ध कराने वालों की पहचान कर ली है।

शुरूआती जांच में इसमें भी सीडी के खेल के पुराने खिलाड़ियों का नाम सामने आ रहा था, लेकिन इस क्षेत्र में नए खिलाड़ियों ने जगह बना ली है। पिछले एक डेढ़ बरस से छत्तीसगढ़ में सीडी बनाने और ब्लैकमेलिंग का खेल चल रहा है। इसके प्रमाण 9-10 माह पहले उस समय मिले जब भाजपा के एक दिग्गज की सीडी की खबरें आई। जैसे ही इसकी खबर सरकार और संगठन को हुई तो उनके बीच हड़कंप मच गया था। इस सीडी की सच्चाई जानने के लिए बकायदा दिल्ली से विश्वासपात्र लोगों की टीम भी आई थी। उनके आने से सीडी सार्वजनिक नहीं हो पाई थी। जिससे यह मामला रफा-दफा हो गया था, लेकिन मंत्री की सीडी की पड़ताल के दौरान इस 9-10 महीने पुराने मामले का लिंक भी जुड़ गया है।

मीडिया की भूमिका पर इस लिहाज से भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि 24 घंटे के भीतर सीडी के नकली होने की रिपोर्ट सामने आ गई। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि हजारों-लाखों साइट से आखिर किस तकनीक से मीडिया ने इसे खोज निकाला। यही वजह है कि संदेह की सुई मीडिया पर घूम रही है। माना जा रहा है कि सीडी की पूरी फिल्म पहले से तैयार थी। जिसे केवल पेश किया गया। पुलिस इस दिशा में जांच कर जानकारी जुटा रही है और कई अहम जानकारियां हाथ भी लगी है, लेकिन रायपुर पुलिस इस हाईप्रोफाइल केस में कोई जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं है।  यही वजह है कि छत्तीसगढ़ पुलिस काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पुलिस पर सरकार और शासन के दबाव में काम करने के आरोप लग सकते हैं। लिहाजा यह तय किया गया है कि पूरी जानकारी और तथ्य जुटाने के बाद सीबीआई को सौंपा जाएगा और सीबीआई के अफसर ही तमाम संदेहियों पर हाथ डालेगी।

कांग्रेस भाजपा के नेता भी अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर सीडी के बहाने शह और मात के खेल को हवा दे रहे हैं। इस कारण भी अफवाहों का बाजार गरम हैं। उनकी कहानी में सत्यता कम गॉसिप ज्यादा है। पिछले दिनों भाजपा के एक नेता ने उद्योगपति, समाजसेवी और कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता की जानकारी शासन-प्रशासन से लेकर मीडिया के लोगों को परोसी थी, लेकिन उसकी बातों की सत्यता अभी तक परखी नहीं जा सकी है। लेकिन इतना जरूर है कि एसआईटी ने जिन 39 लोगों की सूची बनाई है, उनसे पूछताछ के बाद कोई ठोस नतीजा सामने होगा।

 

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